जैन धर्म MCQ Questions in Hindi Part 2 | Jainism Important GK Questions for UPSC, SSC, Railway, BPSC & State Exams

  जैन धर्म के महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न उत्तर | Jainism Important Questions in Hindi

भारतीय इतिहास में जैन धर्म का विशेष महत्व है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, Railway, BPSC, Bihar Daroga, शिक्षक भर्ती, राज्य PCS तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में जैन धर्म से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

इस पोस्ट में जैन धर्म के महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न उत्तर, महावीर स्वामी, तीर्थंकर, जैन दर्शन, जैन साहित्य, जैन संगीति तथा जैन धर्म के सिद्धांतों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह प्रस्तुत किया गया है।

 


जैन धर्म MCQ सेट-2 (Q42–Q81) उत्तर एवं व्याख्या

Q42. दूसरे व्यक्तियों के मन और विचारों को जान लेने वाले ज्ञान को क्या कहा जाता है?

उत्तर: (A) मनःपर्यय ज्ञान

व्याख्या:
मनःपर्यय ज्ञान वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति दूसरों के मन के विचारों को जान सकता है। जैन दर्शन में इसे उच्च कोटि का ज्ञान माना गया है।


Q43. जैन धर्म में सर्वोच्च एवं पूर्ण ज्ञान को क्या कहा जाता है?

उत्तर: (A) कैवल्य (केवल ज्ञान)

व्याख्या:
केवल ज्ञान जैन धर्म में ज्ञान की सर्वोच्च अवस्था है। इसे प्राप्त करने वाला व्यक्ति सर्वज्ञ माना जाता है।


Q44. जैन धर्म के त्रिरत्न कौन-कौन से हैं?

उत्तर: (A) सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक चरित्र

व्याख्या:
मोक्ष प्राप्ति के लिए जैन धर्म में त्रिरत्न का विशेष महत्व है। इन्हें मुक्ति मार्ग का आधार माना जाता है।


Q45. जैन दर्शन के ज्ञान की सापेक्षता के सिद्धांत को क्या कहा जाता है?

उत्तर: (A) स्याद्वाद या अनेकांतवाद

व्याख्या:
स्याद्वाद के अनुसार सत्य के अनेक पक्ष हो सकते हैं। किसी भी वस्तु को केवल एक दृष्टिकोण से नहीं समझा जा सकता।


Q46. स्याद्वाद सिद्धांत का अन्य नाम क्या है?

उत्तर: (A) अनेकांतवाद

व्याख्या:
अनेकांतवाद का अर्थ है कि सत्य बहुआयामी होता है। यही जैन दर्शन की प्रमुख विशेषता है।


Q47. जैन धर्म ईश्वर और आत्मा के संबंध में क्या विचार रखता है?

उत्तर: (A) यह ईश्वर की सत्ता को नहीं मानता परंतु आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करता है।

व्याख्या:
जैन धर्म में सृष्टि के रचयिता ईश्वर की अवधारणा नहीं है। हालांकि आत्मा और कर्म सिद्धांत को स्वीकार किया गया है।


Q48. प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) साँड (वृषभ)

व्याख्या:
ऋषभदेव को आदिनाथ भी कहा जाता है। उनका प्रतीक चिन्ह वृषभ (बैल) है।


Q49. अजितनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) हाथी

व्याख्या:
अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर थे। हाथी शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।


Q50. सम्भवनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) घोड़ा

व्याख्या:
सम्भवनाथ तीसरे तीर्थंकर थे। घोड़ा गति, ऊर्जा और प्रगति का प्रतीक है।


Q51. अभिनंदननाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) बंदर

व्याख्या:
अभिनंदननाथ चौथे तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह बंदर माना जाता है।


Q52. सुमतिनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) चकवा (क्रौंच)

व्याख्या:
सुमतिनाथ पाँचवें तीर्थंकर थे। चकवा पक्षी उनके प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध है।


Q53. पद्मप्रभु का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) लाल कमल

व्याख्या:
पद्मप्रभु छठे तीर्थंकर थे। कमल पवित्रता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है।


Q54. सुपार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) स्वास्तिक

व्याख्या:
स्वास्तिक जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह शुभता और कल्याण का संकेत देता है।


Q55. चन्द्रप्रभु का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) चन्द्रमा

व्याख्या:
चन्द्रप्रभु आठवें तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह चन्द्रमा है।


Q56. सुविधिनाथ (पुष्पदंत) का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) मगरमच्छ

व्याख्या:
सुविधिनाथ नौवें तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह मगरमच्छ माना जाता है।


Q57. शीतलनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) कल्पवृक्ष (श्रीवत्स)

व्याख्या:
शीतलनाथ दसवें तीर्थंकर थे। कल्पवृक्ष इच्छाओं की पूर्ति और समृद्धि का प्रतीक है।


Q58. श्रेयांसनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) गेंडा

व्याख्या:
श्रेयांसनाथ ग्यारहवें तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह गेंडा है।


Q59. वासुपूज्य का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) भैंसा

व्याख्या:
वासुपूज्य बारहवें तीर्थंकर थे। भैंसा शक्ति और धैर्य का प्रतीक माना जाता है।


Q60. विमलनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) सूअर (वराह)

व्याख्या:
विमलनाथ तेरहवें तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह वराह है।


Q61. अनंतनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) सेही

व्याख्या:
अनंतनाथ चौदहवें तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह सेही (Porcupine) माना जाता है।


Q62. धर्मनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) वज्रदंड

व्याख्या:
धर्मनाथ पंद्रहवें तीर्थंकर थे। वज्रदंड शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है।


Q63. शांतिनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) हिरण

व्याख्या:
शांतिनाथ सोलहवें तीर्थंकर थे। हिरण शांति और सौम्यता का प्रतीक है।


Q64. कुन्थुनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) बकरा

व्याख्या:
कुन्थुनाथ सत्रहवें तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह बकरा माना जाता है।


Q65. अरनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) मछली

व्याख्या:
अरनाथ अठारहवें तीर्थंकर थे। मछली जीवन और गतिशीलता का प्रतीक है।


Q66. मल्लिनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) कलश

व्याख्या:
मल्लिनाथ उन्नीसवें तीर्थंकर थे। कलश समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।


Q67. मुनिसुव्रतनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) कछुआ

व्याख्या:
मुनिसुव्रतनाथ बीसवें तीर्थंकर थे। कछुआ धैर्य और संयम का प्रतीक है।


Q68. नमिनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) नीलकमल

व्याख्या:
नमिनाथ इक्कीसवें तीर्थंकर थे। नीलकमल पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।


Q69. अरिष्टनेमि (नेमिनाथ) का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) शंख

व्याख्या:
नेमिनाथ 22वें तीर्थंकर थे। उनका प्रतीक चिन्ह शंख है।


Q70. पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) सर्प फण

व्याख्या:
पार्श्वनाथ के सिर पर सर्प फण का चित्रण किया जाता है। यह उनका प्रमुख प्रतीक है।


Q71. महावीर स्वामी का प्रतीक चिन्ह क्या है?

उत्तर: (A) सिंह

व्याख्या:
सिंह साहस, निर्भीकता और शक्ति का प्रतीक है। यही महावीर स्वामी का प्रतीक चिन्ह है।


Q72. प्रथम जैन संगीति का आयोजन कब हुआ था?

उत्तर: (A) 300 ई.पू.

व्याख्या:
प्रथम जैन संगीति महावीर स्वामी के निर्वाण के बाद आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य जैन सिद्धांतों का संरक्षण था।


Q73. प्रथम जैन संगीति कहाँ आयोजित हुई थी?

उत्तर: (A) पाटलिपुत्र

व्याख्या:
पाटलिपुत्र प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण नगर था। यहीं पहली जैन सभा आयोजित हुई थी।


Q74. प्रथम जैन संगीति की अध्यक्षता किसने की?

उत्तर: (A) स्थूलभद्र

व्याख्या:
स्थूलभद्र प्रसिद्ध जैन आचार्य थे। उन्होंने प्रथम जैन संगीति का नेतृत्व किया था।


Q75. प्रथम जैन संगीति के दौरान कौन-सी प्रमुख घटना हुई?

उत्तर: (A) जैन धर्म का श्वेतांबर और दिगंबर शाखाओं में विभाजन

व्याख्या:
आचार-विचार और नियमों के मतभेद के कारण जैन धर्म दो प्रमुख संप्रदायों में विभाजित हो गया।


Q76. द्वितीय जैन संगीति कब और कहाँ आयोजित हुई?

उत्तर: (A) 512 ई. में वल्लभी (गुजरात)

व्याख्या:
द्वितीय जैन संगीति वल्लभी में आयोजित की गई। इसमें जैन ग्रंथों का संकलन और संपादन किया गया।


Q77. द्वितीय जैन संगीति की अध्यक्षता किसने की?

उत्तर: (A) देवर्धि क्षमाश्रमण

व्याख्या:
देवर्धि क्षमाश्रमण ने इस सभा का नेतृत्व किया था। उनके निर्देशन में जैन आगमों को व्यवस्थित रूप दिया गया।


Q78. जैन धर्म के धार्मिक ग्रंथों को सामूहिक रूप से क्या कहा जाता है?

उत्तर: (A) आगम

व्याख्या:
आगम जैन धर्म के प्रमुख धार्मिक ग्रंथ हैं। इनमें तीर्थंकरों की शिक्षाओं का संग्रह है।


Q79. जैन आगम साहित्य में कितने अंग हैं?

उत्तर: (A) 12 अंग

व्याख्या:
जैन आगम साहित्य का प्रमुख भाग 12 अंगों में विभाजित है। ये जैन धर्म के मूल सिद्धांतों का वर्णन करते हैं।


Q80. जैन साहित्य में कितने उपांग और प्रकीर्ण हैं?

उत्तर: (A) 12 उपांग, 10 प्रकीर्ण

व्याख्या:
अंगों के अतिरिक्त जैन साहित्य में 12 उपांग और 10 प्रकीर्ण ग्रंथ भी शामिल हैं। ये जैन दर्शन को विस्तार से समझाते हैं।


Q81. 'कल्पसूत्र' नामक प्रसिद्ध जैन ग्रंथ की रचना किसने की?

उत्तर: (A) भद्रबाहु

व्याख्या:
कल्पसूत्र जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें तीर्थंकरों, विशेषकर महावीर स्वामी के जीवन का विस्तृत वर्णन मिलता है।


Q82. 'जिन' शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर: (A) विजेता (अपनी इन्द्रियों को जीतने वाला)

व्याख्या:
'जिन' संस्कृत धातु 'जि' से बना है जिसका अर्थ है जीतना। जो व्यक्ति अपनी इन्द्रियों, इच्छाओं और मोह पर विजय प्राप्त कर लेता है, उसे 'जिन' कहा जाता है। यही शब्द आगे चलकर 'जैन' बना।


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Q. जैन धर्म के संस्थापक कौन थे?

उत्तर: जैन परंपरा के अनुसार प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे, जबकि 24वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी थे।

Q. जैन धर्म में कुल कितने तीर्थंकर हुए?

उत्तर: जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए।

Q. जैन धर्म के त्रिरत्न क्या हैं?

उत्तर: सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र।

Q. महावीर स्वामी का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर: कुंडग्राम (वैशाली) में।

Q. जैन धर्म के दो प्रमुख सम्प्रदाय कौन से हैं?

उत्तर: श्वेताम्बर और दिगम्बर।

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