इस भाग में Electrical Measuring Instruments तथा Electrical Machines से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं। इसमें एमीटर, वोल्टमीटर, गैल्वेनोमीटर, ट्रांसफॉर्मर, डायनेमो, विद्युत मोटर, जनित्र, फ्लेमिंग के नियम तथा विद्युत-चुंबकीय प्रेरण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
Q91. विद्युत
धारा मापने के लिए किस यंत्र का उपयोग किया जाता है?
(A) वोल्टमीटर
(B) गैल्वेनोमीटर
(C) एमीटर
(D) ओममीटर
✅ उत्तर: (C) एमीटर
व्याख्या:
एमीटर (Ammeter) का उपयोग किसी विद्युत परिपथ में प्रवाहित होने वाली
धारा को मापने के लिए किया जाता है। इसका SI मात्रक एम्पियर
(Ampere) है। एमीटर को हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम (Series)
में जोड़ा जाता है। इसका आंतरिक प्रतिरोध बहुत कम रखा जाता है ताकि
धारा के मान पर प्रभाव न पड़े।
Q92. एमीटर को
परिपथ में किस प्रकार जोड़ा जाता है?
(A) समानांतर
(B) श्रेणीक्रम
(C) तिरछा
(D) किसी भी प्रकार
✅ उत्तर: (B) श्रेणीक्रम
व्याख्या:
एमीटर को हमेशा श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है क्योंकि इसमें वही धारा प्रवाहित
होनी चाहिए जिसे मापना है। यदि इसे समानांतर जोड़ दिया जाए तो शॉर्ट सर्किट हो
सकता है। इसका आंतरिक प्रतिरोध लगभग शून्य होता है। यह प्रतियोगी परीक्षाओं का
अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।
Q93. वोल्टमीटर
का उपयोग किस राशि को मापने के लिए किया जाता है?
(A) धारा
(B) प्रतिरोध
(C) विभवांतर
(D) शक्ति
✅ उत्तर: (C) विभवांतर
व्याख्या:
वोल्टमीटर किसी परिपथ के दो
बिंदुओं के बीच विभवांतर (Potential Difference) मापता है। इसका SI मात्रक वोल्ट (Volt) है। इसे सदैव समानांतर (Parallel) जोड़ा
जाता है ताकि उपकरण के दोनों सिरों के बीच का विभवांतर मापा जा सके।
Q94. वोल्टमीटर
का आंतरिक प्रतिरोध कैसा होता है?
(A) बहुत कम
(B) शून्य
(C) बहुत अधिक
(D) ऋणात्मक
✅ उत्तर: (C) बहुत
अधिक
व्याख्या:
वोल्टमीटर का आंतरिक प्रतिरोध
बहुत अधिक रखा जाता है ताकि उसमें बहुत कम धारा प्रवाहित हो। इससे परिपथ की
वास्तविक धारा प्रभावित नहीं होती। यदि वोल्टमीटर का प्रतिरोध कम होगा तो मापन में
त्रुटि आएगी। यह तथ्य RRB एवं SSC
परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
Q95. गैल्वेनोमीटर
(Galvanometer) का मुख्य कार्य क्या है?
(A) केवल उच्च धारा मापना
(B) केवल वोल्टेज मापना
(C) बहुत कम विद्युत धारा का
पता लगाना
(D) प्रतिरोध मापना
✅ उत्तर: (C) बहुत कम
विद्युत धारा का पता लगाना
व्याख्या:
गैल्वेनोमीटर अत्यंत संवेदनशील
यंत्र है जो बहुत कम विद्युत धारा की उपस्थिति एवं दिशा का पता लगाता है। इससे
सीधे बड़ी धारा नहीं मापी जा सकती। आवश्यक संशोधन करके इसे एमीटर या वोल्टमीटर में
बदला जा सकता है। यह विद्युत मापन यंत्रों का आधार है।
Q96. गैल्वेनोमीटर
को एमीटर में बदलने के लिए उसके साथ क्या जोड़ा जाता है?
(A) उच्च प्रतिरोध
(B) शंट प्रतिरोध
(C) संधारित्र
(D) प्रेरक
✅ उत्तर: (B) शंट
प्रतिरोध
व्याख्या:
गैल्वेनोमीटर के समानांतर कम
मान का शंट प्रतिरोध जोड़कर उसे एमीटर बनाया जाता है। शंट अधिक धारा को
अपने से प्रवाहित होने देता है और गैल्वेनोमीटर सुरक्षित रहता है। इस सिद्धांत पर
सभी एमीटर बनाए जाते हैं।
Q97. गैल्वेनोमीटर
को वोल्टमीटर में बदलने के लिए क्या जोड़ा जाता है?
(A) शंट प्रतिरोध
(B) उच्च प्रतिरोध
(C) संधारित्र
(D) फ्यूज
✅ उत्तर: (B) उच्च
प्रतिरोध
व्याख्या:
गैल्वेनोमीटर के श्रेणीक्रम में
उच्च मान का प्रतिरोध जोड़कर उसे वोल्टमीटर बनाया जाता है। इससे उसमें बहुत कम
धारा प्रवाहित होती है और वह सुरक्षित रहता है। यही कारण है कि वोल्टमीटर का
आंतरिक प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।
Q98. निम्नलिखित
में से कौन-सा यंत्र सबसे अधिक संवेदनशील होता है?
(A) एमीटर
(B) वोल्टमीटर
(C) गैल्वेनोमीटर
(D) ऊर्जा मीटर
✅ उत्तर: (C) गैल्वेनोमीटर
व्याख्या:
गैल्वेनोमीटर अत्यंत छोटी धारा
का भी पता लगा सकता है। इसी कारण इसे सबसे संवेदनशील विद्युत मापक यंत्र माना जाता
है। एमीटर और वोल्टमीटर इसी में संशोधन करके बनाए जाते हैं। यह प्रतियोगी
परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न है।
Q99. यदि एमीटर
को गलती से समानांतर जोड़ दिया जाए, तो क्या होगा?
(A) सही मापन होगा।
(B) परिपथ बंद हो जाएगा।
(C) शॉर्ट सर्किट होने की
संभावना होगी।
(D) वोल्टेज बढ़ जाएगा।
✅ उत्तर: (C) शॉर्ट
सर्किट होने की संभावना होगी।
व्याख्या:
एमीटर का आंतरिक प्रतिरोध बहुत
कम होता है। यदि इसे समानांतर जोड़ दिया जाए, तो अधिकांश धारा एमीटर से होकर गुजरेगी, जिससे शॉर्ट
सर्किट और यंत्र के खराब होने की संभावना रहती है। इसलिए एमीटर को हमेशा
श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
विद्युत आवेश एवं कूलॉम का नियम MCQ Questions in Hindi (Q1–Q30)
Q100. निम्नलिखित
में से कौन-सा कथन सही है?
(A) एमीटर का प्रतिरोध बहुत
अधिक होता है।
(B) वोल्टमीटर का प्रतिरोध
बहुत कम होता है।
(C) एमीटर श्रेणीक्रम में तथा
वोल्टमीटर समानांतर में जोड़ा जाता है।
(D) गैल्वेनोमीटर केवल
वोल्टेज मापता है।
✅ उत्तर: (C) एमीटर
श्रेणीक्रम में तथा वोल्टमीटर समानांतर में जोड़ा जाता है।
व्याख्या:
एमीटर का आंतरिक प्रतिरोध बहुत
कम तथा वोल्टमीटर का बहुत अधिक होता है। एमीटर धारा मापने के लिए श्रेणीक्रम में
और वोल्टमीटर विभवांतर मापने के लिए समानांतर में जोड़ा जाता है। यह विद्युत मापन
का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है और लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता
है।
Q101. एमीटर की
परास (Range) बढ़ाने के लिए किसका उपयोग किया जाता है?
(A) उच्च प्रतिरोध
(B) शंट प्रतिरोध
(C) संधारित्र
(D) ट्रांसफॉर्मर
✅ उत्तर: (B) शंट
प्रतिरोध
व्याख्या:
एमीटर की परास बढ़ाने के लिए
उसके समानांतर कम मान का शंट प्रतिरोध जोड़ा जाता है। इससे अधिक धारा शंट
से होकर गुजरती है तथा केवल थोड़ी धारा एमीटर में जाती है। इससे एमीटर सुरक्षित
रहता है और अधिक धारा माप सकता है। यह प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्वपूर्ण प्रश्न
है।
Q102. वोल्टमीटर
की परास बढ़ाने के लिए उसके साथ क्या जोड़ा जाता है?
(A) शंट प्रतिरोध
(B) उच्च प्रतिरोध
(C) फ्यूज
(D) प्रेरक
✅ उत्तर: (B) उच्च
प्रतिरोध
व्याख्या:
वोल्टमीटर की परास बढ़ाने के
लिए उसके श्रेणीक्रम (Series) में उच्च
मान का प्रतिरोध जोड़ा जाता है। इससे वोल्टमीटर में बहुत कम धारा प्रवाहित होती है
और वह अधिक विभवांतर माप सकता है। इसे Multiplier Resistance भी कहा जाता है।
Q103. मीटर ब्रिज
(Meter Bridge) का उपयोग किसे मापने के लिए किया जाता है?
(A) धारा
(B) विभवांतर
(C) अज्ञात प्रतिरोध
(D) शक्ति
✅ उत्तर: (C) अज्ञात
प्रतिरोध
व्याख्या:
मीटर ब्रिज व्हीटस्टोन ब्रिज
(Wheatstone Bridge) के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसका उपयोग किसी अज्ञात प्रतिरोध का मान
ज्ञात करने के लिए किया जाता है। प्रयोगशालाओं में यह अत्यंत उपयोगी उपकरण है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इसका सिद्धांत एवं उपयोग पूछा जाता है।
Q104. पोटेंशियोमीटर
(Potentiometer) का मुख्य उपयोग क्या है?
(A) धारा मापना
(B) EMF की तुलना एवं
विभवांतर मापना
(C) प्रतिरोध बढ़ाना
(D) शक्ति मापना
✅ उत्तर: (B) EMF की
तुलना एवं विभवांतर मापना
व्याख्या:
पोटेंशियोमीटर एक अत्यंत
संवेदनशील यंत्र है जिसका उपयोग दो सेल के EMF की तुलना तथा बहुत
छोटे विभवांतर को मापने के लिए किया जाता है। यह धारा नहीं खींचता, इसलिए इसका मापन अधिक शुद्ध माना जाता है। यह RRB ALP एवं तकनीकी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण विषय है।
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Q105. डायनेमो (Dynamo)
किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
(A) जूल का नियम
(B) विद्युत-चुंबकीय प्रेरण
(C) ओम का नियम
(D) कूलॉम का नियम
✅ उत्तर: (B) विद्युत-चुंबकीय
प्रेरण
व्याख्या:
डायनेमो फैराडे के
विद्युत-चुंबकीय प्रेरण के नियम पर कार्य करता है। इसमें चुंबकीय क्षेत्र में
चालक को घुमाने पर विद्युत धारा उत्पन्न होती है। साइकिल डायनेमो इसका सामान्य
उदाहरण है। यह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
Q106. ट्रांसफॉर्मर
का उपयोग किसके लिए किया जाता है?
(A) धारा उत्पन्न करने के लिए
(B) AC वोल्टेज बढ़ाने या
घटाने के लिए
(C) DC वोल्टेज बढ़ाने के लिए
(D) प्रतिरोध मापने के लिए
✅ उत्तर: (B) AC वोल्टेज
बढ़ाने या घटाने के लिए
व्याख्या:
ट्रांसफॉर्मर केवल प्रत्यावर्ती
धारा (AC) पर कार्य करता है। इसका उपयोग वोल्टेज को आवश्यकता अनुसार बढ़ाने (Step-up)
या घटाने (Step-down) के लिए किया जाता है।
विद्युत शक्ति के लंबी दूरी तक संचरण में ट्रांसफॉर्मर की महत्वपूर्ण भूमिका होती
है।
Q107. ट्रांसफॉर्मर
किस धारा पर कार्य करता है?
(A) केवल DC
(B) केवल AC
(C) AC एवं DC दोनों
(D) स्थिर विद्युत
✅ उत्तर: (B) केवल AC
व्याख्या:
ट्रांसफॉर्मर विद्युत-चुंबकीय
प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसके लिए बदलता हुआ चुंबकीय फ्लक्स आवश्यक होता है। यह केवल AC में संभव है। DC में फ्लक्स परिवर्तन नहीं होता,
इसलिए ट्रांसफॉर्मर कार्य नहीं करता। यह प्रतियोगी परीक्षाओं का
अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है।
Q108. स्टेप-अप
ट्रांसफॉर्मर (Step-up Transformer) का कार्य क्या है?
(A) वोल्टेज घटाना
(B) वोल्टेज बढ़ाना
(C) धारा समाप्त करना
(D) प्रतिरोध बढ़ाना
✅ उत्तर: (B) वोल्टेज
बढ़ाना
व्याख्या:
स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर निम्न
वोल्टेज को उच्च वोल्टेज में बदलता है। विद्युत शक्ति के लंबी दूरी तक संचरण के
समय इसका उपयोग किया जाता है ताकि ऊर्जा की हानि कम हो। इससे संचरण अधिक दक्ष (Efficient) बनता है।
Q109. स्टेप-डाउन
ट्रांसफॉर्मर (Step-down Transformer) का उपयोग कहाँ किया
जाता है?
(A) बिजलीघर में उच्च वोल्टेज
बनाने के लिए
(B) घरों में 220V आपूर्ति प्राप्त करने के लिए
(C) बैटरी चार्ज करने के लिए DC
बनाने में
(D) केवल प्रयोगशाला में
✅ उत्तर: (B) घरों
में 220V आपूर्ति प्राप्त करने के लिए
व्याख्या:
स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर उच्च
वोल्टेज को कम करके घरेलू उपयोग योग्य वोल्टेज (लगभग 220V) में परिवर्तित करता है। वितरण ट्रांसफॉर्मर इसी सिद्धांत
पर कार्य करते हैं। इसके बिना घरेलू उपकरण सुरक्षित रूप से कार्य नहीं कर सकते।
Q110. निम्नलिखित
में से कौन-सा कथन सही है?
(A) ट्रांसफॉर्मर DC पर कार्य करता है।
(B) मीटर ब्रिज से धारा मापी
जाती है।
(C) पोटेंशियोमीटर का उपयोग EMF
की तुलना के लिए किया जाता है।
(D) शंट प्रतिरोध वोल्टमीटर
की परास बढ़ाने के लिए लगाया जाता है।
✅ उत्तर: (C) पोटेंशियोमीटर
का उपयोग EMF की तुलना के लिए किया जाता है।
व्याख्या:
पोटेंशियोमीटर दो सेल के EMF की तुलना करने तथा सूक्ष्म विभवांतर मापने के लिए प्रयोग
किया जाता है। ट्रांसफॉर्मर केवल AC पर कार्य करता है,
मीटर ब्रिज अज्ञात प्रतिरोध मापता है और शंट प्रतिरोध एमीटर की परास
बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसलिए विकल्प (C) सही
उत्तर है।
Q111. विद्युत
मोटर (Electric Motor) का मुख्य कार्य क्या है?
(A) विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा
ऊर्जा में बदलना
(B) यांत्रिक ऊर्जा को
विद्युत ऊर्जा में बदलना
(C) विद्युत ऊर्जा को
यांत्रिक ऊर्जा में बदलना
(D) प्रकाश ऊर्जा को विद्युत
ऊर्जा में बदलना
✅ उत्तर: (C) विद्युत
ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलना
व्याख्या:
विद्युत मोटर वह उपकरण है जो
विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है। इसका उपयोग पंखा, मिक्सर, वॉशिंग मशीन, पानी की मोटर तथा इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जाता है। यह चुंबकीय क्षेत्र
में धारा प्रवाहित चालक पर लगने वाले बल के सिद्धांत पर कार्य करती है। प्रतियोगी
परीक्षाओं में यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
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Q112. विद्युत
मोटर किस सिद्धांत पर कार्य करती है?
(A) जूल का ऊष्मीय नियम
(B) विद्युत-चुंबकीय प्रेरण
(C) चुंबकीय क्षेत्र में धारा
प्रवाहित चालक पर लगने वाला बल
(D) कूलॉम का नियम
✅ उत्तर: (C) चुंबकीय
क्षेत्र में धारा प्रवाहित चालक पर लगने वाला बल
व्याख्या:
जब किसी चालक में विद्युत धारा
प्रवाहित होती है और उसे चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल कार्य करता है। इसी सिद्धांत पर विद्युत मोटर
कार्य करती है। इस बल के कारण मोटर का कुंडल घूमने लगता है और यांत्रिक कार्य
उत्पन्न होता है।
Q113. विद्युत
मोटर में स्प्लिट रिंग (Split Ring Commutator) का कार्य
क्या होता है?
(A) वोल्टेज बढ़ाना
(B) धारा की दिशा बदलना
(C) प्रतिरोध बढ़ाना
(D) चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न
करना
✅ उत्तर: (B) धारा की
दिशा बदलना
व्याख्या:
स्प्लिट रिंग कम्यूटेटर
प्रत्येक आधे चक्र के बाद कुंडली में प्रवाहित धारा की दिशा बदल देता है। इससे
कुंडली पर लगने वाला बल एक ही दिशा में बना रहता है और मोटर लगातार घूमती रहती है।
DC मोटर में इसका विशेष महत्व होता है।
Q114. फ्लेमिंग
का बाएँ हाथ का नियम (Fleming's Left Hand Rule) किसमें
प्रयुक्त होता है?
(A) जनित्र
(B) ट्रांसफॉर्मर
(C) विद्युत मोटर
(D) बैटरी
✅ उत्तर: (C) विद्युत
मोटर
व्याख्या:
फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम
मोटर में चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
इसमें अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा एक-दूसरे
के लंबवत रखे जाते हैं। तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र, मध्यमा धारा
और अंगूठा बल की दिशा दर्शाता है। यह नियम RRB एवं SSC
परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
Q115. विद्युत
जनित्र (Electric Generator) का मुख्य कार्य क्या है?
(A) विद्युत ऊर्जा को
यांत्रिक ऊर्जा में बदलना
(B) यांत्रिक ऊर्जा को
विद्युत ऊर्जा में बदलना
(C) ऊष्मा ऊर्जा को विद्युत
ऊर्जा में बदलना
(D) प्रकाश ऊर्जा को विद्युत
ऊर्जा में बदलना
✅ उत्तर: (B) यांत्रिक
ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलना
व्याख्या:
विद्युत जनित्र (Generator) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता
है। इसमें चुंबकीय क्षेत्र के भीतर कुंडली को घुमाया जाता है जिससे विद्युत धारा
उत्पन्न होती है। बिजलीघरों में बड़े जनित्रों का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए
किया जाता है।
Q116. विद्युत
जनित्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
(A) ओम का नियम
(B) जूल का नियम
(C) विद्युत-चुंबकीय प्रेरण
(D) कूलॉम का नियम
✅ उत्तर: (C) विद्युत-चुंबकीय
प्रेरण
व्याख्या:
जनित्र फैराडे के विद्युत-चुंबकीय
प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब किसी चालक को चुंबकीय क्षेत्र में
घुमाया जाता है, तो उसमें प्रेरित विद्युत
वाहक बल (EMF) उत्पन्न होता है। इसी से विद्युत धारा प्राप्त
होती है।
Q117. फ्लेमिंग
का दाएँ हाथ का नियम (Fleming's Right Hand Rule) किसके लिए
प्रयोग किया जाता है?
(A) मोटर में बल की दिशा
ज्ञात करने के लिए
(B) जनित्र में प्रेरित धारा
की दिशा ज्ञात करने के लिए
(C) प्रतिरोध मापने के लिए
(D) शक्ति मापने के लिए
✅ उत्तर: (B) जनित्र
में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए
व्याख्या:
फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम
जनित्र में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
इसमें तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र, अंगूठा
चालक की गति तथा मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा बताती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में
बाएँ और दाएँ हाथ के नियम में अंतर अक्सर पूछा जाता है।
Q118. विद्युत-चुंबकीय
प्रेरण (Electromagnetic Induction) की खोज किस वैज्ञानिक ने
की थी?
(A) न्यूटन
(B) फैराडे
(C) ओम
(D) एम्पियर
✅ उत्तर: (B) फैराडे
व्याख्या:
सन 1831 में माइकल फैराडे ने विद्युत-चुंबकीय प्रेरण की खोज
की थी। उन्होंने सिद्ध किया कि बदलते हुए चुंबकीय क्षेत्र से चालक में विद्युत
वाहक बल उत्पन्न किया जा सकता है। इसी सिद्धांत पर जनित्र और ट्रांसफॉर्मर कार्य
करते हैं।
Q119. निम्नलिखित
में से कौन-सा उपकरण विद्युत-चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है?
(A) विद्युत हीटर
(B) ट्रांसफॉर्मर
(C) विद्युत इस्त्री
(D) फ्यूज
✅ उत्तर: (B) ट्रांसफॉर्मर
व्याख्या:
ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक
कुंडली में प्रवाहित AC बदलता हुआ
चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है, जिससे द्वितीयक कुंडली में EMF
प्रेरित होता है। यही विद्युत-चुंबकीय प्रेरण का सिद्धांत है। इसी
कारण ट्रांसफॉर्मर केवल AC पर कार्य करता है।
50 Science MCQ in Hindi with Answers | विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर 2025
Q120. निम्नलिखित
में से कौन-सा कथन सही है?
(A) मोटर यांत्रिक ऊर्जा को
विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
(B) जनित्र विद्युत ऊर्जा को
यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है।
(C) फ्लेमिंग का बायाँ हाथ का
नियम मोटर के लिए तथा दायाँ हाथ का नियम जनित्र के लिए प्रयुक्त होता है।
(D) ट्रांसफॉर्मर DC पर कार्य करता है।
✅ उत्तर: (C) फ्लेमिंग
का बायाँ हाथ का नियम मोटर के लिए तथा दायाँ हाथ का नियम जनित्र के लिए प्रयुक्त
होता है।
व्याख्या:
विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को
यांत्रिक ऊर्जा में तथा जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
मोटर में फ्लेमिंग का बायाँ हाथ और जनित्र में दायाँ हाथ का नियम
लागू होता है। ट्रांसफॉर्मर केवल AC पर कार्य करता है। इसलिए विकल्प (C) सही
उत्तर है।


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